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  • Iran Crisis पर White House में घमासान, Donald Trump और JD Vance के बीच बढ़ी दरार
    by प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क on April 13, 2026 at 5:08 pm

    अमेरिका की राजनीति में इन दिनों एक नई हलचल देखने को मिल रही है, जहां ईरान को लेकर असफल बातचीत के बाद जिम्मेदारी तय करने की चर्चा तेज हो गई है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मजाक में कहा था कि अगर ईरान से समझौता होता है तो उसका श्रेय वह लेंगे, और अगर नहीं हुआ तो दोष उपराष्ट्रपति जेडी वेंस पर जाएगा।बता दें कि अब जब इस्लामाबाद में हुई बातचीत बेनतीजा रही और वेंस खाली हाथ लौटे हैं, तो यह बयान फिर से चर्चा में आ गया है। मौजूद जानकारी के अनुसार, ईरान के साथ बातचीत आसान नहीं रही है। इससे पहले 2015 में हुआ परमाणु समझौता भी करीब 20 महीने की लंबी प्रक्रिया के बाद संभव हो पाया था, जिसे ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में 2018 में खत्म कर दिया था।गौरतलब है कि इस बार भी हालात काफी जटिल रहे। ईरान की ओर से सख्त शर्तें रखी गईं, जिनमें प्रतिबंधों में पूरी छूट और अपने परमाणु कार्यक्रम को जारी रखने की मांग शामिल बताई जा रही है। वहीं अमेरिकी पक्ष की कुछ प्रमुख शर्तों को ईरान ने बातचीत के दौरान खारिज कर दिया।मौजूद जानकारी के अनुसार, ट्रंप प्रशासन के अंदर भी इस मुद्दे को लेकर मतभेद सामने आए हैं। वेंस को इस बातचीत की जिम्मेदारी ऐसे समय दी गई, जब उनकी स्थिति पहले की तुलना में कमजोर मानी जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने कई बार सैन्य कार्रवाई के खिलाफ अपनी राय रखी थी, जिससे उनकी पकड़ प्रशासन में कमजोर हुई है।गौरतलब है कि ट्रंप का रुख भी लगातार बदलता नजर आया है। कभी वह ईरान के प्रस्ताव के कुछ हिस्सों को स्वीकार करने की बात करते हैं, तो कभी होर्मुज जलडमरूमध्य में सख्ती दिखाने के संकेत देते हैं। इस अस्थिर नीति ने बातचीत को और कठिन बना दिया।इस बीच अमेरिका के अंदर भी दबाव बढ़ रहा है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर ईंधन की कीमतों पर दिख रहा है, वहीं आगामी चुनाव को लेकर भी राजनीतिक माहौल गर्म है। विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में हैं।मौजूद हालात यह संकेत देते हैं कि अगर आने वाले समय में कोई ठोस परिणाम नहीं निकलता है, तो इसका राजनीतिक असर भी देखने को मिल सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप पहले भी अपने सहयोगियों को जिम्मेदार ठहराते रहे हैं और हाल के महीनों में कई अहम पदों पर बदलाव भी किए गए हैं।गौरतलब है कि उपराष्ट्रपति होने के कारण वेंस को पद से हटाना आसान नहीं है, लेकिन राजनीतिक स्तर पर उनकी छवि और भविष्य पर असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस मामले का ठीकरा उनके सिर फोड़ा जाता है, तो उनके आगे के राजनीतिक सफर पर इसका असर पड़ना तय माना जा रहा है।

  • Elon Musk के एक Tweet ने फिर छेड़ी Covid Vaccine पर बहस, Side Effects पर उठे नए सवाल
    by प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क on April 13, 2026 at 4:53 pm

    दुनियाभर में कोविड टीके को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है, जिसकी वजह एक बयान और उसके बाद हुई चर्चाएं बनी हैं। इस बार मामला तब सुर्खियों में आया जब कारोबारी एलन मस्क ने कहा कि कोविड टीके की दूसरी खुराक लेने के बाद उन्हें ऐसा लगा जैसे उनकी हालत बेहद खराब हो रही है।बता दें कि यह बयान उस समय आया जब एक पुराने वीडियो ने सोशल मीडिया पर तेजी से ध्यान खींचा। इस वीडियो में डॉ हेलमुट स्टर्ज नाम के एक विशेषज्ञ जर्मनी की संसद की एक समिति के सामने अपनी बात रखते दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि कोविड के टीकों को मंजूरी देने से पहले जरूरी शुरुआती परीक्षण पूरी तरह नहीं किए गए।मौजूद जानकारी के अनुसार, डॉ स्टर्ज पहले एक बड़ी दवा कंपनी में विष विज्ञान विभाग से जुड़े रहे हैं, लेकिन वह साल 2007 में सेवानिवृत्त हो चुके थे, यानी कोविड टीके के विकास से काफी पहले। उन्होंने अपनी गवाही में कहा कि कुछ महत्वपूर्ण परीक्षण जैसे कैंसर से जुड़े जोखिम और प्रजनन क्षमता पर असर को लेकर पर्याप्त अध्ययन नहीं किया गया।गौरतलब है कि उन्होंने जर्मनी की औषधि निगरानी संस्था द्वारा दर्ज करीब 2133 मौतों का जिक्र किया, जो टीकाकरण के बाद रिपोर्ट की गई थीं। इसके बाद उन्होंने एक अनुमान के आधार पर यह संख्या कई गुना ज्यादा होने की बात कही। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल अनुमान है, न कि किसी वैज्ञानिक अध्ययन से निकला निष्कर्ष।बता दें कि टीकाकरण के बाद किसी घटना की रिपोर्ट होना और यह साबित होना कि वही टीका उसका कारण है, दोनों अलग-अलग बातें होती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार यह स्पष्ट करते रहे हैं कि ऐसे आंकड़ों का सीधा मतलब कारण साबित करना नहीं होता।मौजूद जानकारी के अनुसार, यूरोप की दवा नियामक एजेंसियों ने पहले ही कहा है कि कोविड टीकों को उस समय के मानकों के अनुसार मंजूरी दी गई थी और उनके फायदे जोखिम से ज्यादा रहे हैं। कई शोधों में यह भी सामने आया है कि जहां टीकाकरण दर ज्यादा रही, वहां मौतों की संख्या अपेक्षाकृत कम रही।गौरतलब है कि कुछ दुर्लभ मामलों में टीके के बाद दिल से जुड़ी सूजन जैसी समस्याएं सामने आई हैं, लेकिन इन्हें बहुत कम संख्या में देखा गया है। वहीं, शोध यह भी बताते हैं कि खुद कोविड संक्रमण से ऐसी समस्याओं का खतरा ज्यादा होता है।इस पूरे मामले में एलन मस्क के बयान ने बहस को और तेज कर दिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि इस तरह की गवाही को लेकर व्यापक चर्चा क्यों नहीं हो रही। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि किसी एक बयान या अनुमान को पूरी सच्चाई मान लेना उचित नहीं है और हर दावे को वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर परखना जरूरी है।मौजूद हालात यह दिखाते हैं कि कोविड टीकों को लेकर सवाल और चर्चा अभी भी जारी है। वैज्ञानिक समुदाय इन मुद्दों पर लगातार अध्ययन कर रहा है, लेकिन अब तक उपलब्ध प्रमाण यही संकेत देते हैं कि टीकों ने महामारी के दौरान बड़ी संख्या में जान बचाने में अहम भूमिका निभाई है।

  • भारत के दुश्मन पर टूट पड़ा दुनिया का सबसे सनकी शख्स, हिली दुनिया!
    by प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क on April 13, 2026 at 3:07 pm

    एक व्यक्ति ने भारत के एक बड़े दुश्मन देश का जीना मुश्किल कर रखा है। इसी व्यक्ति ने भारत के दुश्मन देश को चेतावनी दी है कि मुझे 1 बिलियन अमेरिकी डॉलर और अपने देश की सबसे खूबसूरत महिला दो नहीं तो तुम्हें बर्बाद कर दूंगा। इस अजीब मगर बेहद ही दिलचस्प घटना ने पूरी दुनिया का ध्यान फिलहाल कुछ समय के लिए ईरान और अमेरिका से हटा दिया है। जिस व्यक्ति ने यह पूरा बवाल खड़ा किया है वह युगांडा का डिफेंस मिनिस्टर मुहूजी केनेरू गाबा है। मुहूजी ने भारत के दुश्मन देश तुर्की से $1 अरब डॉलर यानी करीब ₹9000 करोड़ मांगे हैं। इसी के साथ-साथ तुर्की की सबसे खूबसूरत महिला को अपनी पत्नी बनाने की मांग कर दी है। मोहूजी ने चेतावनी दी है कि अगर तुर्की ने मेरी यह मांग पूरी नहीं की तो मैं युगांडा के 1 लाख सैनिक इजराइल भेज दूंगा और तुर्की का बैंड बजा दूंगा। इसे भी पढ़ें: US Kuwait Base Attack | पेंटागन बनाम जमीनी हकीकत! कुवैत बेस हमले में बचे सैनिकों ने खोली सैन्य दावों की पोलजानकारी के लिए बता दें कि जिस तरह से तुर्की भारत का दुश्मन है, उसी तरह से इजराइल का भी दुश्मन है। युगांडा को यह बात पता है कि हाल ही में इजराइल ने कहा था कि तुर्की अब हमारे लिए नया ईरान है। हम तुर्की पर हमला कर सकते हैं। इसी का फायदा अब युगांडा ने उठा लिया है। अगर तुर्की ने यह नहीं किया तो मेरे 1 लाख सैनिक इजराइल भेजे जाएंगे। लेकिन सवाल है कि युगांडा के डिफेंस मिनिस्टर तुर्की के पीछे क्यों पड़ गए हैं? दरअसल ये सारा झगड़ा एक दूसरे अफ्रीकी देश सोमालिया को लेकर है। सोमालिया में एक आतंकी संगठन है अल शबाब। इसे भी पढ़ें: Prabhasakshi NewsRoom: Shrikant Purohit को मिला प्रमोशन, कर्नल से बने ब्रिगेडियर, साजिशकर्ताओं को लगा बड़ा झटकाहालांकि यह पहली बार नहीं है जब युगांडा के आर्मी चीफ ने ऐसी मांग रखी हो। इससे पहले काइनेर रुगावा ने वर्ष 2022 में इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से शादी करने की इच्छा जताई थी। तब कायने रुगावा ने कहा था कि अगर मेलोनी शादी के लिए राजी हो जाती हैं तो वह इटली को 100 गाय देंगे। मेलोनी ने शादी के लिए हां नहीं किया तो और खूबसूरत महिला से शादी का कायने रुगाबा का सपना अधूरा रह गया। इसीलिए अब कई वर्षों बाद उन्होंने तुर्की की सबसे खूबसूरत महिला को अपनी पत्नी बनाने की मांग रखी है। काइना रुगावा ने तुर्किए को चेतावनी भी दी है। उन्होंने तुर्किए को 30 दिनों का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि अगर उनकी मांगे पूरी नहीं हुई तो युगांडा में तुर्की का दूतावास बंद कर दिया जाएगा और राजनैतिक संबंध खत्म कर दिए जाएंगे। किसी देश के राष्ट्रपति के बेटे और आर्मी चीफ की बेतुकी बातों का सोशल मीडिया पर खूब मजाक बन रहा है।

  • जयशंकर ने तेल सप्लाई पर किया बड़ा खेल, पाकिस्तान को फंसाया!
    by प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क on April 13, 2026 at 2:56 pm

    मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर का अचानक यूएई पहुंचना एक बड़ी राजनीतिक घटना थी। इस दौरे की टाइमिंग को लेकर चर्चा गर्म है कि आखिर एस जय शंकर का दौरा तनाव के वक्त क्यों हुआ और इसके पीछे का कूटनीतिक संदेश क्या है? एस जयशंकर का संयुक्त अरब अमीरात पहुंचना सिर्फ एक दौरा नहीं बल्कि बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच भारत की बड़ी कूटनीतिक दांव माना जा रहा है। एस जयशंकर ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर इस मुलाकात को एक खास सम्मान बताया है। उन्होंने पीएम मोदी की तरफ से यूएई नेतृत्व को शुभकामनाएं दी हैं और कहा है कि पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के समय यूएई ने भारतीय लोगों को सुरक्षा और अच्छा ध्यान रखा है। उन्होंने यह भी कहा है कि भारत और यूएई के रिश्ते और मजबूत हो रहे हैं और इसे आगे बढ़ाने में यूएई की अहम भूमिका है। इसे भी पढ़ें: PoK के नजदीक China ने बना दी नई County Cenling, भारत को घेरने के लिए चली रणनीतिक चालयह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब स्टेट ऑफ हॉर्मोनस में तनाव बढ़ने से दुनिया भर में तेल और गैस की सप्लाई पर असर पड़ रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव की वजह इस समुद्री रास्ते को जहाजों का आनाजाना प्रभावित हुआ है। जिससे ऊर्जा आपूर्ति में दिक्कतें आ रही हैं। इस समस्या को देखते हुए भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखने के लिए कई कदम उठाए हैं। पिछले कुछ हफ्तों में भारत ने तेल और गैस की सप्लाई को फिर से समान करने के लिए तेजी से काम किया है। इसके लिए भारत ने सऊदी अरब, क़तर और संयुक्त अरब अमीरात जैसे बड़े तेल उत्पादकों देशों से सीधे बातचीत शुरू कर दी है। यानी एस जयशंकर देश में गैस और तेल की सप्लाई को बनाए रखने का ठोस रास्ता निकालने पहुंचे हैं। ताकि भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा किया जा सके। इसे भी पढ़ें: ट्रंप ने 158 ,जहाज तबाह किए, ईरान की पूरी नौसेना खत्म!स्टेट ऑफ हॉर्मोस के बंद होने पर तेल और गैस की सप्लाई जारी रह सके। मुमकिन है कि भारत बब अल मंदेव स्ट्रीट के रास्ते गल्फ ऑफ अडन रूट से तेल और गैस की सप्लाई जारी रखने की कोशिश कर रहा है। उधर जयशंकर के दौरे के बीच ही यूएई में पाकिस्तान को लेकर गहरी नाराजगी देखी गई है। अब इसे इत्तेफाकी कहा जा रहा है कि जयशंकर का दौरा हुआ और उसी वक्त ईरान को लेकर पाकिस्तान की नरमी का जमकर विरोध शुरू हो गया। यूएई के इन्फ्लुएंसरर अमजद ताहा के बयान भी चर्चे में आ गए हैं। उन्होंने कहा है कि भारत एक मजबूत और भरोसेमंद देश है। साथ ही उन्होंने पाकिस्तान पर आरोप लगाए हैं कि वह ईरान का समर्थन करता है और खाड़ी देशों के खिलाफ उसके रुख भी आलोचना नहीं करते। उन्होंने यह भी कहा है कि पाकिस्तान की नीतियां भरोसेमंद बिल्कुल भी नहीं है और यह वो केवल अपने फायदे के लिए ही काम करता है। वहीं दूसरी तरफ उन्होंने यूएई की नीति की तारीफ की है और कहा है कि यूएई अपनी सुरक्षा को लेकर किसी तरह का समझौता नहीं करता। इन सभी बातों का समय इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि यह सब उस वक्त सामने आया है जब जयशंकर का यूएई दौरा चल रहा था। इससे यह साफ होता है कि इस समय दुनिया में कूटनीतिक, सुरक्षा और ऊर्जा से जुड़े मुद्दे एक साथ जुड़े हुए हैं।

  • शांति के बीच पाकिस्तान का खेल, सऊदी में 13000 सैनिक भेजकर मचा दिया बवाल
    by प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क on April 13, 2026 at 2:52 pm

    पूरी दुनिया इस वक्त शांति की तरफ बढ़ने की कोशिश कर रही है। लेकिन पाकिस्तान है कि हर मौके पर अपनी बेइज्जती करवाने का कोई रास्ता निकाल ही लेता है। एक तरफ मध्य पूर्व में तनाव कम हो रहा था। सीज फायर लागू हो चुका था। ईरान ने भी अपने हमले रोक दिए थे। लेकिन तभी पाकिस्तान ने फिर वही पुराना खेल खेल दिया। जिस वक्त दुनिया शांति की तरफ बढ़ रही थी। उस वक्त पाकिस्तान ने अपने फाइटर चैट्स और करीब 13,000 सैनिक सऊदी अरब में भेज दिए। दरअसल 2025 में पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच एक रक्षा समझौता हुआ था। जिसके मुताबिक अगर किसी एक देश पर हमला होता है तो उसे दोनों देशों पर हमला माना जाएगा। कागजों पर यह समझौता भले ही मजबूत दिखता था, लेकिन असल में यह पाकिस्तान की मजबूरी और उसकी निर्भरता को उजागर करता है। सबसे बड़ी बात देखिए जब ईरान सऊदी अरब पर हमले कर रहा था, तब पाकिस्तान कहीं नजर नहीं आया। इसे भी पढ़ें: ट्रंप ने 158 ,जहाज तबाह किए, ईरान की पूरी नौसेना खत्म!जैसे ही माहौल शांत हुआ,पाकिस्तान दिखावा करने पहुंच गया। यानी खतरे के वक्त गायब और बाद में हीरो बनने की कोशिश। अब यहां एक और बड़ा खेल देखिए। एक तरफ पाकिस्तान खुद को शांति का दूत दिखाना चाहता है। इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत करवाने की कोशिश कर रहा है और दूसरी तरफ उसी इलाके में अपनी सेना भेजकर एक पक्ष के साथ खड़ा भी हो रहा है। आप खुद सोचिए क्या कोई देश एक साथ मध्यस्थ भी बन सकता है और किसी एक पक्ष का सैनिक साथी भी यही पाकिस्तान के दोहरी नीति है जो उसकी कूटनीति पर सबसे बड़ा सवाल खड़ा करती है। असल में यह कोई नई बात नहीं है। पाकिस्तान लंबे समय से सऊदी अरब पर निर्भर रहा है और इसके बदले में सऊदी अरब उसे बार-बार आर्थिक मदद देता है। जब यूएई ने पाकिस्तान से अपना कर्ज वापस मांगा तब भी सऊदी अरब ही सामने आया। 2018 में 6 अरब का पैकेज और आज भी आर्थिक संकट के वक्त सऊदी का सहारा यानी साफ है कि पाकिस्तान की विदेश नीति या रणनीति पर नहीं बल्कि मजबूरी बन चुकी है। जहां फैसले राष्ट्रीय हित से नहीं बल्कि पैसों के दबाव से लिए जाते हैं। यही वजह है कि आज पाकिस्तान अपने ही सैनिकों को हजारों किलोमीटर दूर भेज रहा है। जबकि उसके अपने देश में हालत स्थिर नहीं है। इसे भी पढ़ें: Strait of Hormuz में जंग की उलटी गिनती शुरू, America की नाकेबंदी पर Iran ने दे डाली दुनिया को खतरनाक चेतावनीपहले ही ईरान और सऊदी अरब के बीच तनाव बना हुआ है। ऐसे में पाकिस्तान का खुलकर सऊदी के साथ खड़ा होना उसे एक पक्षीय खिलाड़ी बना देता है। जिसका सीधा असर भविष्य में उस पर पड़ सकता है। यानी आने वाले समय में पाकिस्तान खुद अपने लिए नई मुश्किलें खड़ी कर सकता है। कुल मिलाकर पाकिस्तान ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वो अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी छवि सुधारने में नहीं बल्कि उसे और उलझाने में माहिर है। एक तरफ शांति वार्ता दूसरी तरफ सैन्य तैनाती ये दोनों चीजें साथ-साथ नहीं चल सकती। लेकिन पाकिस्तान से शायद यही उम्मीद की जा सकती थी। 

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