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  • झूठों की मिसाल बनेंगे Donald Trump, एक घंटे में बोलते हैं 7 झूठ! Iran ने दी होर्मुज को फिर से बंद करने की धमकी
    by प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क on April 18, 2026 at 4:12 am

    ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघर ग़ालिबफ़ ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर “एक घंटे में सात झूठे दावे” करने का आरोप लगाया। उन्होंने तेहरान के इस इरादे को दोहराया कि अगर अमेरिका की तरफ़ से नाकेबंदी जारी रही, जिसे ईरान “अमेरिकी नाकेबंदी” कहता है, तो वह होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर देगा। यह ट्रंप के इस दावे के बिल्कुल उलट है कि यह रास्ता “व्यापार के लिए खुला” है। ग़ालिबफ़ ने कहा कि ट्रंप ने “एक घंटे में सात दावे” किए, जिनमें से सभी “झूठे” थे, हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि वे दावे क्या थे।ठीक उसी समय जब शुक्रवार शाम को ट्रंप एरिजोना में एक कार्यक्रम में बोल रहे थे, ग़ालिबफ़ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट किया। इसमें उन्होंने कहा कि अगर नाकेबंदी जारी रही, तो होर्मुज जलडमरूमध्य खुला नहीं रहेगा। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि जलडमरूमध्य से गुज़रने के लिए एक “निर्धारित मार्ग” का पालन करना होगा और इसके लिए ईरान से अनुमति लेनी ज़रूरी होगी।अपने ट्वीट में ग़ालिबफ़ ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक घंटे में सात झूठे दावे किए। उन्होंने चेतावनी दी कि युद्ध या बातचीत, किसी भी स्थिति में ऐसे “झूठ” से कोई सफलता नहीं मिलेगी। साथ ही, उन्होंने यह भी चेताया कि अगर नाकेबंदी जारी रही, तो होर्मुज जलडमरूमध्य खुला नहीं रहेगा।ग़ालिबफ़ ने आगे कहा कि जलडमरूमध्य की स्थिति और उसे नियंत्रित करने वाले नियम-कानून सोशल मीडिया पर की गई घोषणाओं से नहीं, बल्कि ज़मीनी हकीकत और वहां की गतिविधियों से तय होंगे। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के बीच सोशल मीडिया पर लगातार बयानबाज़ी चल रही है; दोनों ही पक्ष इन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल महत्वपूर्ण घोषणाएं करने और एक-दूसरे को जवाब देने के लिए कर रहे हैं। इसे भी पढ़ें: TCS Nashik Case में आरोपी निदा खान के माता-पिता का दावा, नासिक के ‘गॉडमैन’ को बचाने की साज़िशउन्होंने यह भी ज़िक्र किया कि “मीडिया युद्ध” और “जनमत को प्रभावित करना” इस संघर्ष के दो बेहद महत्वपूर्ण पहलू हैं। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि ईरान ऐसी चालबाज़ियों से बिल्कुल भी प्रभावित नहीं होगा। इससे पहले, ग़ालिबफ़ ने कहा था कि होर्मुज जलडमरूमध्य व्यापार के लिए खुला है, लेकिन अमेरिकी नाकेबंदी अभी भी जारी है। यह बयान ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची की उस घोषणा के बाद आया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि युद्धविराम के दौरान वाणिज्यिक जहाज़ों के लिए यह जलडमरूमध्य खुला रहेगा। इसे भी पढ़ें: US-Israel-Iran War | ईरान को Donald Trump की ‘डेडलाइन’, बुधवार तक समझौता नहीं, तो फिर शुरू होगी बमबारीशेयर बाज़ार ने इस ख़बर पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। नए सिरे से जगी उम्मीदों के चलते बाज़ार में तेज़ी आई, और कच्चे तेल की कीमतें भी गिर गईं, जिससे निवेशकों के चेहरे खिल उठे। हालांकि, ज़मीनी स्तर पर देखें तो होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने को लेकर अनिश्चितता के बादल अभी भी छाए हुए थे, जिसके चलते वहां जहाज़ों की आवाजाही काफी कम रही।लेकिन, ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी ‘फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी’ ने अराघची के इस बयान पर संदेह ज़ाहिर किया। एजेंसी ने इस बयान को “अप्रत्याशित” बताया और कहा कि इससे ईरानी समाज में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है। ट्रम्प ने Truth Social पर इस घोषणा का अपना हिस्सा शेयर किया, जिसके बाद उन्होंने कई न्यूज़ आउटलेट्स को फ़ोन पर इंटरव्यू दिए। Bloomberg के साथ बातचीत में, उन्होंने दावा किया कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को “अनिश्चित काल” के लिए रोकने पर सहमत हो गया है, हालाँकि ईरानी अधिकारियों ने इस दावे की पुष्टि नहीं की है।इस बीच, ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रवक्ता, इब्राहिम रज़ाई ने Al Jazeera को बताया कि ईरानी संसद एक मसौदा कानून तैयार करने की प्रक्रिया में है, जिसका उद्देश्य ट्रांज़िट शुल्क लेकर होर्मुज़ जलडमरूमध्य को सुरक्षित करना है।Truth Social पर एक और पोस्ट में, ट्रम्प ने कहा कि ईरान अपनी “परमाणु धूल” सौंपने पर सहमत हो गया है – जिसका मतलब एनरिच्ड यूरेनियम से था। हालाँकि, तेहरान ने ऐसे किसी भी समझौते से इनकार करते हुए उनके दावे को खारिज कर दिया है। ट्रम्प ने यह भी कहा कि इज़राइल लेबनान पर बमबारी बंद कर देगा, और अपनी बात यह कहकर खत्म की, “अब बहुत हो गया।”

  • US-Israel-Iran War | ईरान को Donald Trump की ‘डेडलाइन’, बुधवार तक समझौता नहीं, तो फिर शुरू होगी बमबारी
    by प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क on April 18, 2026 at 4:03 am

    मध्य पूर्व में जारी भारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर कड़ा रुख अख्तियार किया है। शुक्रवार को एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि बुधवार तक दोनों देशों के बीच किसी “बड़े समझौते” पर सहमति नहीं बनी, तो वर्तमान में लागू सीज़फ़ायर (युद्धविराम) को खत्म कर दिया जाएगा। खाड़ी क्षेत्र में लगातार तनाव के बीच यह संकेत मिला है कि सैन्य टकराव फिर से बढ़ सकता है।फीनिक्स, एरिजोना से वॉशिंगटन लौटते समय, एयर फ़ोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए, ट्रंप ने इस बात पर अनिश्चितता जताई कि क्या यह सीज़फ़ायर आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा, “हो सकता है मैं इसे आगे न बढ़ाऊँ, लेकिन (ईरानी बंदरगाहों पर) नाकाबंदी जारी रहेगी।” उन्होंने आगे कहा, “तो एक तरफ नाकाबंदी है, और दुर्भाग्य से हमें फिर से बम गिराना शुरू करना पड़ सकता है।” ये टिप्पणियाँ US और ईरान के बीच रुकी हुई कूटनीतिक कोशिशों की पृष्ठभूमि में आई हैं। इनमें पाकिस्तान में हुई हालिया अप्रत्यक्ष बातचीत भी शामिल है, जिससे कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया।हालांकि, पर्दे के पीछे से हो रही बातचीत से तनाव कम होने की उम्मीद जगी थी, लेकिन दोनों पक्ष अभी भी कई अहम मुद्दों पर बंटे हुए हैं। इन मुद्दों में प्रतिबंधों में ढील, परमाणु समझौते से जुड़ी प्रतिबद्धताएँ और समुद्री सुरक्षा शामिल हैं। इसे भी पढ़ें: TCS Nashik Case में आरोपी निदा खान के माता-पिता का दावा, नासिक के ‘गॉडमैन’ को बचाने की साज़िशहॉरमुज़ जलडमरूमध्य के आसपास चल रहे तनाव ने स्थिति को और भी जटिल बना दिया है। यह एक बेहद अहम वैश्विक ऊर्जा गलियारा है, जहाँ से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की शिपमेंट होती है।हालांकि वॉशिंगटन का कहना है कि यह जलमार्ग “खुला” है और जहाज़ों के आने-जाने के लिए सुरक्षित है, लेकिन तेहरान ने बार-बार चेतावनी दी है कि अगर US का दबाव जारी रहा, तो इस रास्ते तक पहुँच को सीमित किया जा सकता है। US ने अप्रैल के मध्य से ही ईरानी बंदरगाहों को निशाना बनाते हुए एक नौसैनिक नाकाबंदी लागू कर रखी है, जिसका मकसद तेहरान से जुड़ी समुद्री गतिविधियों को रोकना है।अमेरिकी अधिकारियों ने बताया है कि इस नाकाबंदी के तहत, ईरानी बंदरगाहों में घुसने या वहाँ से निकलने की कोशिश करने वाले जहाज़ों को वापस भेज दिया गया है। हालांकि, ईरान ने इस कदम को गैर-कानूनी और भड़काऊ बताया है। इसे भी पढ़ें: पाकिस्‍तान बनेगा कूटनीति का केंद्र! US-Iran संकट पर सोमवार को दूसरे दौर की वार्ता संभवईरानी नेताओं ने भी हॉरमुज़ जलडमरूमध्य की स्थिति और व्यापक बातचीत को लेकर US के दावों का कड़ा विरोध किया है। तेहरान के अधिकारियों ने संकेत दिया है कि अगर यह नाकाबंदी जारी रहती है, तो इसका सीधा असर हॉरमुज़ के रास्ते होने वाली जहाज़ों की आवाजाही पर पड़ सकता है। इससे वैश्विक बाज़ारों में चिंता बढ़ गई है, जो पहले से ही आपूर्ति में रुकावटों को लेकर काफी संवेदनशील हैं।ट्रंप की ये ताज़ा टिप्पणियाँ दोनों पक्षों के बीच बढ़ती खाई को उजागर करती हैं, भले ही दोनों ही पक्ष सार्वजनिक तौर पर किसी समझौते के लिए तैयार होने का संकेत दे रहे हों। US के राष्ट्रपति ने बार-बार किसी समझौते पर पहुँचने को लेकर उम्मीद जताई है, लेकिन साथ ही उन्होंने यह चेतावनी भी दी है कि अगर बातचीत नाकाम होती है, तो इसके सैन्य परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

  • Donald Trump का ईरान पर बड़ा दांव: ‘मशीनें लेकर जाएंगे और सारा यूरेनियम अमेरिका वापस लाएंगे’
    by प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क on April 18, 2026 at 3:30 am

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी परमाणु गतिरोध के बीच एक अत्यंत साहसी और चौंकाने वाला दावा किया है, जिसे अब उनकी ‘एक्स्कवेटर डिप्लोमेसी’ के रूप में देखा जा रहा है। एरिजोना में एक सार्वजनिक मंच से ट्रंप ने घोषणा की कि ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) के भंडार को सौंपने और उसे अमेरिका ले जाने पर सहमत हो गया है। ट्रंप के अनुसार, वे बड़ी खुदाई मशीनों के साथ ईरान जाकर इस परमाणु सामग्री को सुरक्षित रूप से वापस लाएंगे। हालांकि, यह बयान जितना प्रभावशाली है, उतना ही विवादास्पद भी, क्योंकि ईरानी अधिकारियों ने यूरेनियम हस्तांतरण के ऐसे किसी भी समझौते से साफ इनकार कर दिया है। ट्रंप का यह ‘बड़ा दांव’ एक ओर बातचीत के जरिए समाधान की उम्मीद जगाता है, तो दूसरी ओर होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी की उनकी धमकी ने सैन्य और आर्थिक तनाव को और गहरा कर दिया है। अब पूरी दुनिया की नजरें पाकिस्तान में होने वाले दूसरे दौर की वार्ता पर टिकी हैं, जहां यह साफ होगा कि ट्रंप का यह दावा हकीकत है या केवल कूटनीतिक दबाव बनाने की एक रणनीति।इसे भी पढ़ें: IPL 2026: कोलकाता नाइट राइडर्स की फिर हार, प्लेऑफ की रहा हुई मुश्किल, गुजरात के लिए शुभमन गिल ने खेली कप्तानी पारी डोनाल्ड ट्रंप का चौंकाने वाला दावाअमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बातचीत को लेकर सकारात्मक रुख दिखाते हुए दावा किया है कि ईरान “हर बात पर सहमत” हो गया है। ट्रंप ने विशेष रूप से ईरान के संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) के भंडार को लेकर बड़ा बयान दिया। एरिजोना के फीनिक्स में आयोजित ‘टर्निंग पॉइंट USA’ कार्यक्रम में ट्रंप ने कहा: “हम ईरान के साथ मिलकर काम करेंगे और वहां से यूरेनियम लाने के लिए बड़ी खुदाई मशीनों (Excavators) का इस्तेमाल करेंगे। हम उसे वापस अमेरिका ले आएंगे।” हालांकि, ईरानी अधिकारियों ने ट्रंप के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है और यूरेनियम हस्तांतरण की किसी भी बात से इनकार किया है।इसे भी पढ़ें: Indian Sports में बड़ा विवाद: कोच पर नशे में Harassment का आरोप, Paralympic Champion Sumit Antil ने खोले राज पहले दौर की विफलता और बढ़ता विवादपिछले सप्ताह इस्लामाबाद में हुई वार्ता के विफल होने का मुख्य कारण परमाणु कार्यक्रम पर असहमति थी।अमेरिकी पक्ष: उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) ने कहा कि ईरान का अमेरिकी मांगों को न मानना विफलता का कारण बना।ईरानी पक्ष: ईरान ने अमेरिका की मांगों को “अनुचित” करार दिया और कहा कि उनका परमाणु कार्यक्रम केवल नागरिक उपयोग के लिए है।होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर बढ़ता तनावबातचीत विफल होने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी की घोषणा कर दी है। ईरान ने इसे संघर्ष-विराम समझौते का उल्लंघन बताया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि अमेरिका अपने वादों से पीछे हटता है, तो ईरान “आवश्यक जवाबी कदम” उठाएगा और इस मामले में कोई नरमी नहीं बरती जाएगी।सोमवार को होने वाली यह संभावित वार्ता वैश्विक तेल आपूर्ति और मध्य-पूर्व की स्थिरता के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि इस बार भी बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुँचती है, तो होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी दुनिया भर की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा संकट पैदा कर सकती है।

  • पाकिस्‍तान बनेगा कूटनीति का केंद्र! US-Iran संकट पर सोमवार को दूसरे दौर की वार्ता संभव
    by प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क on April 18, 2026 at 3:23 am

    मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच, संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान एक बार फिर कूटनीतिक मेज पर आमने-सामने आ सकते हैं। CNN की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देशों के बीच बातचीत का दूसरा दौर सोमवार (20 अप्रैल) को पाकिस्तान में होने की संभावना है। सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधिमंडल इस सप्ताहांत तक पाकिस्तान पहुँच सकते हैं। हालांकि, आधिकारिक तौर पर न तो वॉशिंगटन और न ही तेहरान ने इस बैठक की पुष्टि की है। इससे पहले पिछले सप्ताह इस्लामाबाद में हुई 21 घंटे लंबी बातचीत बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो गई थी। इसे भी पढ़ें: Indian Sports में बड़ा विवाद: कोच पर नशे में Harassment का आरोप, Paralympic Champion Sumit Antil ने खोले राज यह घटनाक्रम तब सामने आया जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ बातचीत पर भरोसा जताया और दावा किया कि इस्लामिक गणराज्य ने अमेरिकियों के साथ बातचीत में “हर बात पर सहमति जताई है।” उन्होंने दावा किया कि इसमें ईरान से एनरिच्ड यूरेनियम के भंडार को हटाना और उसे वापस US लाना भी शामिल है। हालांकि, ईरानी अधिकारियों ने देश के यूरेनियम को लेकर ट्रंप के दावे को खारिज कर दिया है। इसे भी पढ़ें: Pune Airport पर Indian Air Force के विमान की ‘हार्ड लैंडिंग’, रनवे रहा घंटों तक बाधित, सभी क्रू मेंबर सुरक्षितफीनिक्स, एरिजोना में ‘टर्निंग पॉइंट USA’ कार्यक्रम में ट्रंप ने कहा, “हम ईरान के साथ मिलकर, बहुत सारी खुदाई मशीनों (excavators) के साथ वहां जाकर इसे हासिल करेंगे। हमें उन सबसे बड़ी खुदाई मशीनों की ज़रूरत होगी जिनकी आप कल्पना कर सकते हैं। लेकिन हम ईरान के साथ मिलकर काम करेंगे, हम इसे हासिल करेंगे, और हम इसे वापस अपने घर US ले जाएंगे।”इस्लामाबाद में ‘असफल’ बातचीतUS-ईरान बातचीत की बात करें तो, बातचीत का पहला दौर पिछले सप्ताह पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हुआ था। बातचीत लगातार 21 घंटे तक चली, लेकिन दोनों पक्षों के बीच गतिरोध को खत्म करने में असफल रही। US के उपराष्ट्रपति JD Vance, जो अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे थे, ने कहा कि बातचीत इसलिए असफल रही क्योंकि ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर वाशिंगटन की मांगों पर सहमत होने से इनकार कर दिया।US, इजरायल के साथ मिलकर, लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम का विरोध करता रहा है; ट्रंप और Vance दोनों ने बार-बार दोहराया है कि तेहरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके विपरीत, ईरान, जो यह कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम नागरिक उपयोग के लिए है, ने कहा कि बातचीत US की ‘अनुचित’ मांगों के कारण असफल रही।बातचीत की विफलता के बाद, ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की नाकेबंदी की घोषणा की, जिसे ईरान ने पिछले सप्ताह हुए संघर्ष-विराम समझौते का उल्लंघन बताया। ईरान ने कहा है कि यदि US अपने ही वादों का उल्लंघन करने का फैसला करता है, तो वह “आवश्यक जवाबी कदम उठाएगा।” ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने कहा “इस संबंध में कोई नरमी नहीं बरती जाएगी।

  • तेल, गैस…भारत का दिल देखो, मुसीबत में एक नहीं अनेक देशों को कर रहा मदद
    by प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क on April 17, 2026 at 2:37 pm

    पूरी दुनिया के सामने ऊर्जा संकट है। यूरोप से लेकर अफ्रीका और अफ्रीका से लेकर एशियाई देश हर कोई ऊर्जा संकट के लिए परेशान है। वजह साफ है अमेरिका ईरान जंग के कारण स्टेट ऑफ हार्मोंस बंद और फिर इससे पूरे दुनिया के ग्लोबल सप्लाई चेन पर असर। ऐसे में भारत के पड़ोसी देश मुसीबत में हैं तो क्या भारत इनका साथ छोड़ देगा? जवाब है नहीं। यही जानकारी भारत के विदेश मंत्रालय से सामने आई है। बात भूटान की हो, नेपाल की हो, श्रीलंका की हो, मॉरिसिस की हो, हर जगह भारत ने उनकी ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करने का काम किया है। पड़ोसी कई एक पड़ोसी मुल्क से हमारे पास उनकी तरफ से अनुरोध आया है कि हम उनको ऊर्जा सामग्री उनको उपलब्ध कराएं। कई एक देशों को भारत ऊर्जा सामग्री उपलब्ध करा रहा है। लेकिन इस दरमियान भारत की अपनी जरूरतें हैं उसको मद्देनजर रखते हुए और किस प्रकार की यहां पर उपलब्धि है उसको मद्देनजर रखते हुए किया जा रहा है। भारत ने बांग्लादेश को 22,000 मेट्रिक टन हाई स्पीड डीज़ल मार्च के महीने में मुहैया कराया था और साथ ही साथ इस महीने भी हमारे जो उनको ऊर्जा सामग्री और डीजल दी जाती है वह भी उनको दिया जा रहा है। इसे भी पढ़ें: पलट गया खेल.. ट्रंप को ‘न्यूक्लियर बम’ सौंपेगा खलीफा?श्रीलंका के संदर्भ में आपको पता है कि 38,000 मेट्रिक टन के पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स भारत ने पिछले महीने उनको भेजा था। एक सप्ताह पहले हमारे विदेश मंत्री मॉरिशस के दौरे पर गए थे। उस दौरान दोनों देशों के बीच में बातचीत हुई इस मुद्दे पर और अभी हम लोग इस प्रक्रिया में हैं कि दोनों देशों के बीच में गवर्नमेंट टू गवर्नमेंट के स्तर पर एक एग्रीमेंट को रूप फाइनल रूप देने की प्रयास कर रहे हैं ताकि मॉरिशस की जो ऊर्जा स्थिति है वह बेहतर हो और भारत उनको ऑयल और गैस  प्रदान करें। जहां तक नेपाल का सवाल है, नेपाल और भारत के बीच जो पहले से चल रहे जो जो एग्रीमेंट हैं, एक तो एग्रीमेंट इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन और नेपाल के बीच में है जिसके तहत हम उनको पेट्रोलियम पदार्थ उसको उनको उपलब्ध कराते हैं। और यह उनकी जरूरतों के मुताबिक उनको मुहैया कराया जा रहा है। इसे भी पढ़ें: ईरान जंग की सबसे बड़ी खबर, 49 दिन बाद पूरी तरह खोला गया होर्मुज स्ट्रेटविदेश मंत्रालय ने बताया कि बिना कोई इंटरप्शन के, बिना कोई बाधा के उनको दिया जा रहा है। उसी तरह भूटान के साथ भी हमारे दोनों देशों के बीच में एक समझ है, एक साझेदारी है। ऊर्जा पदार्थ को लेके उनको भी ऊर्जा हम मुहैया करा रहे हैं। जहां तक मालदीव और सेशल्स की बात है,  उनसे भी कुछ हमारे पास अनुरोध आया है और अह उनसे उनसे हमारी लगातार इस मामले में बातचीत चल रही है। मैं साथ-साथ यह भी कहना चाहूंगा कि हमारे पड़ोसी देशों की तरफ से उनके सरकार की तरफ से उन्होंने इस बात की सराहना की है कि हम लोग भारत की तरफ से उनको ऊर्जा सामग्री उनको इस दौरान जब पश्चिम एशिया में संघर्ष चल रहा है इस दरमियान उनको मुहैया कराया जा रहा है।

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