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ईरान में टेंशन जारी, डिफेंस डील के बाद जमीन वाली तैयारी, मिडिल ईस्ट में क्या नया गुल खिलाएगी सऊदी-पाक की यारी
by प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क on January 20, 2026 at 7:50 am
पाकिस्तान वायु सेना ने ईरान संकट के बीच सऊदी अरब की सेना के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास करने के लिए हाथ मिलाया है। गौरतलब है कि इन दोनों देशों के अलावा आठ अन्य देश भी इस अभ्यास में भाग ले रहे हैं। खबरों के अनुसार, पाकिस्तान वायु सेना (पीएएफ) का एक दल19 जनवरी को सऊदी अरब पहुंचा, जो एक बहुराष्ट्रीय हवाई युद्ध अभ्यास में हिस्सा लेने जा रहा है। यह दल एफ-16 ब्लॉक-52 लड़ाकू विमानों से लैस है। यह जानकारी सोमवार को सेना के मीडिया विंग, इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) द्वारा साझा की गई। आईएसपीआर ने अपने बयान में कहा कि पीएएफ की टुकड़ी सऊदी अरब के किंग अब्दुलअज़ीज़ एयर बेस पर उतरी है। इस अभ्यास में सऊदी अरब, पाकिस्तान, फ्रांस, इटली, ग्रीस, कतर, बहरीन, जॉर्डन, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका के लड़ाकू विमान और युद्ध सहायता इकाइयां भाग ले रही हैं।इसे भी पढ़ें: सिर्फ 120 मिनट के लिए भारत आया ये ताकतवर शख्स, मोदी का तहलका!ईरान संकट के बीच दो मुस्लिम देश की सेना ने मिलाए हाथबहुराष्ट्रीय अभ्यास का नाम स्पीयर्स ऑफ विक्ट्री-2026 है।यह अभ्यास भाग लेने वाली वायु सेनाओं के बीच अंतर-संचालनीयता, परिचालन समन्वय, आपसी समझ और क्षमता विकास को बढ़ाने के लिए एक मजबूत मंच प्रदान करेगा।इसमें बड़े पैमाने पर सैन्य तैनाती और रात्रिकालीन हवाई अभियानों पर विशेष जोर दिया जाएगा।यह अभ्यास एकीकृत खुफिया, निगरानी और टोही (आईएसआर) और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों से जुड़े मिशनों का भी आयोजन करेगा।आईएसपीआर ने कहा कि इस बहुराष्ट्रीय मंच में भाग लेकर, पाकिस्तान वायु सेना का उद्देश्य सहयोगी वायु सेनाओं के साथ समन्वय को और मजबूत करना है।बयान के अनुसार, इस अंतरराष्ट्रीय तैनाती के लिए, पीएएफ के लड़ाकू विमान पाकिस्तान में अपने घरेलू ठिकानों से सीधे सऊदी अरब के लिए उड़ान भरे, जिससे पीएएफ की लंबी दूरी की परिचालन और तैनाती क्षमता का प्रदर्शन हुआ।
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सिर्फ 120 मिनट के लिए भारत आया ये ताकतवर शख्स, मोदी का तहलका!
by प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क on January 20, 2026 at 6:31 am
भारत और यूएई के रिश्तों में अब एक और नया अध्याय जुड़ चुका है। जहां कल यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अलनहान प्रधानमंत्री मोदी के निमंत्रण पर भारत पहुंचे थे। आपको बता दें हवाई अड्डे पर खुद प्रधानमंत्री मोदी उनका स्वागत करने पहुंचे थे। जिसके बाद दोनों ही नेताओं ने एक ही कार में सवार होकर प्रधानमंत्री आवास तक की यात्रा की। प्रधानमंत्री आवास पर पहुंचकर दोनों नेताओं ने कई अहम मुद्दों पर आपस में बातचीत की और दोनों ही देशों के बीच कई अहम समझौतों पर सहमति भी बनी है। यूएई राष्ट्रपति का यह दौरा बेहद महत्वपूर्ण रहा। जहां भारत और यूएई ने रक्षा, व्यापार, यमन, गाजा, डिजिटल एंबेसी और निवेश जैसे कई अहम मुद्दों पर आपसी सहमति बनाई और समझौते किए। यूराई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद नाहयान करीब 2 घंटे के दौरे पर दिल्ली पहुंचे, जहां पीएम नरेंद्र मोदी से उनकी मुलाकात हुई। एयरपोर्ट पर पीएम मोदी ने खुद उनका स्वागत किया और दोनों नेता – एक ही कार में पीएम आवास तक पहुंचे। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल स्तर पर बातचीत हुई। इस मुलाकात में दोनों देशों ने 2032 तक सालाना व्यापार को दोगुना करके 200 अरब डॉलर – तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया। इसे भी पढ़ें: UAE President का सिर्फ 2 घंटे का Delhi दौरा, PM Modi ने एयरपोर्ट पर किया स्वागत, दोस्ती की दिखी गर्मजोशीअभी दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब डॉलर के है।दोनों देशों ने ‘डिजिटल एम्बेसी स्थापित करने पर सहमति जताई है। डिजिटाल एम्बेसी मतलब देश का जरूरी और संवेदनशील डेटा दूसरे देश में सुरक्षित सर्वर पर रखना, ताकि संकट या सइबर हमले में भी डेटा सुरक्षित रहे। भुगतान प्लेटफॉर्म जोड़ने, क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट सिस्टम, भारतीय उत्पादों को नए बाजारों तक पहुंचाने और गुजरात के धोलेरा स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन में यूएई की भागीदारी जैसे 12 पाइंट पर सहमति बनी। इस यात्रा की एक और खास बात रही और वो थी दोनों देशों ने मिलकर पाकिस्तान को लपेटे में लिया है। दरअसल दोनों नेताओं ने दुनिया भर में चल रहे कुछ अहम मुद्दों पर अपने विचार भी साझा किए जिनमें पश्चिमी एशिया और वैश्विक हालात पर दोनों नेताओं के विचार थे। लेकिन सबसे अहम बात यह रही कि शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए दोनों देशों ने आपसी सहमति बनाई है। इसके लिए दोनों देशों ने सीमा पर आतंकवाद की कड़ी शब्दों में निंदा की और इस बात पर जोर दिया कि आतंकवाद करने वालों, उन्हें समर्थन देने वालों और आतंकवाद को फंड करने वालों को भी न्याय के दायरे में लाया जाना चाहिए। इसे भी पढ़ें: Iran के लिए ट्रंप ने ऐसा क्या प्लान बनाया, UAE के राष्ट्रपति ने मोदी से मिलने के लिए अपना प्लेन भारत घुमाया, क्या बड़ा होने वाला है?भारत को 10 साल की एलएनजी सप्लाई डीलएचपीसीएल और यूएई के बीच 10 साल का एलएनजी (प्राकृतिक गैस) समझौता हुआ, जिसके तहत भारत को 2028 से लंबी अवधि की सप्लाई मिलेगी। डील के मुताबिक एचपीसीएल हर साल 0.5 मिलियन मीट्रिक टन एलएनजी खरीदेगा।भारत और यूएई ने बड़े परमाणु रिएक्टर और छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर पर मिलकर काम करने पर सहमति दी। दोनों देश इन रिएक्टरों के संचालन, देखरेख, नई तकनीक और परमाणु सुरक्षा में सहयोग बढ़ाएंगेभारत में यूएई की साझेदारी से सुपरकंप्यूटिंग क्लस्टर स्थापित किया जाएगा, जिससे हाई लेवल कंप्यूटिंग, रिसर्च और डेटा प्रोसेसिंग क्षमता को मजबूती मिलेगी।यात्रा की टाइमिंग बहुत महत्वपूर्ण हैएमबीजेड की यात्रा के सकारात्मक परिणामों के बावजूद, कई लोग अब भी यह जानने को उत्सुक हैं कि यूएई नेता की भारत की अचानक यात्रा का कारण क्या था। अगर गौर से देखा जाए, तो मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियां ही सब कुछ स्पष्ट करती हैं। सबसे पहले, यह यमन को लेकर यूएई और सऊदी अरब के बीच बढ़ते तनाव की पृष्ठभूमि में हुआ है। पिछले साल दिसंबर के अंत में, यमन में पनप रहे तनाव तब खुलकर सामने आ गए जब सऊदी अधिकारियों ने यूएई पर यमन में अलगाववादी समूहों का समर्थन करने का आरोप लगाया और दक्षिणी यमन के मुकाला शहर में एक हवाई हमला किया, जिसमें यूएई से दक्षिणी संक्रमणकालीन परिषद (एक ऐसा ही अलगाववादी समूह) को भेजे जा रहे हथियारों की कथित खेप को निशाना बनाया गया। यूएई ने पीछे हटते हुए कहा कि वह यमन से अपने सैनिकों को वापस बुला लेगा।
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चिकन नेक के पास चीनी राजदूत को लेकर क्यों गए युनूस? भारत के साथ खतरनाक खेल खेल रहा बांग्लादेश
by प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क on January 20, 2026 at 6:12 am
बांग्लादेश भारत के बीच का सबसे बड़ा विवाद जिसमें चीन की एंट्री हो रही है। एक ऐसा विवाद जो भारत के राज्य पश्चिम बंगाल को प्यासा मार सकता है। भारत बांगलादेश के बीच इन दिनों संबंध काफी बुरे दौर से गुजर रहे हैं। इसकी कहानी आप सब जानते हैं और बाकी रही सही कसर अब एक विवाद पूरा कर रहा है। बांग्लादेश भारत के बीच के सबसे पुराने विवाद ने इस कहानी को फिर एक नई दिशा दे दी है। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने तिस्ता प्रोजेक्ट को चीन को देने का फैसला कर लिया है। अब खबर है कि बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस की सरकार ने ढाका में चीनी राजदूत को तीस्ता परियोजना क्षेत्र का दौरा कराया, जो भारत के सिलीगुड़ी कॉरिडोर या चिकन नेक के निकट स्थित है। मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने स्पष्ट किया कि चीनी राजदूत याओ वेन की हालिया यात्रा तीस्ता नदी व्यापक प्रबंधन और पुनर्स्थापन परियोजना के लिए तकनीकी मूल्यांकन पर केंद्रित थी।इसे भी पढ़ें: Pakistan में भीषण धमाका, दहला कराची, लोगों के उड़े चिथड़े!यह घटनाक्रम युनुस द्वारा चीनी अर्थव्यवस्था के विस्तार संबंधी विवादास्पद सुझावों और भारत के पूर्वोत्तर को भूमि से घिरा हुआ बताने के बाद क्षेत्रीय स्तर पर बढ़ते दबाव के बीच सामने आया है। बांग्लादेश की जल संसाधन सलाहकार सैयदा रिजवाना हसन, वेन के साथ रंगपुर के तेपामधुपुर तालुक शाहबाजपुर में परियोजना क्षेत्र में गईं और कहा कि चीन जल्द से जल्द तीस्ता मास्टर प्लान (टीएमपी) को लागू करना शुरू करने के लिए उत्सुक है। खबर है कि बांग्लादेश ने चीन की सरकारी कंपनी पावर चाइना को इस साल दिसंबर तक एक कांसेप्ट नोट और 2026 के आखिर तक इस पर रिसर्च तैयार करने को कह दिया है। द टेलीग्राफ इंडिया के मुताबिक बांग्लादेश वाटर डेवलपमेंट बोर्ड और पावर चाइना के बीच इसके लिए समझौता ज्ञापन पर साइन हो चुका है। इस समझौते के तहत पावर चाइना को इस साल के आखिर तक कांसेप्ट नोट और 2026 के आखिर तक प्रोजेक्ट पर रिसर्च तैयार करनी है। जो वोह बात में ढाका को सौंपी जाएगी। इसके लिए चीन की सरकारी कंपनी और चाइना के कर्मचारियों ने लाल मोहिन हाट रंगपुर कुरीग्राम बोगरा जयपुर हाट और और गाई मंधाना शुरू कर दिया है अब यहां यह समझना जरूरी है कि चीन ने इस रिसर्च की शुरुआत बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के साथ ऐसे वक्त पर की है, जब भारत इस प्रोजेक्ट को बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के साथ मिलकर शुरू करने वाला था।इसे भी पढ़ें: Khalistan-Gangster गठजोड़ का खुलासा, Republic Day पर Delhi में बड़े हमले का Terror Plot!तीस्ता नदी परियोजना है क्यातिस्ता नदी का प्रमुख स्रोत तसो लहामते की सीमा के पास है। यानी उत्तरी सिक्किम में तकरीबन 5000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां से तिस्ता पश्चिम बंगाल से होते हुए बांग्लादेश चली जाती है। जहां आगे ब्रह्मपुत्र में यह मिलती है। तिस्ता नदी लगभग 400 किमी लंबी है। नदी का 300 किमी से ज्यादा बड़ा हिस्सा हमारे यानी भारत में है, जबकि 100 किमी से कुछ ज्यादा हिस्सा बांग्लादेश में है। तिस्ता नदी का बंटवारा भारत बांग्लादेश के बीच 1947 में ही हो गया था। तब बांग्लादेश ईस्ट पाकिस्तान हुआ करता था। वैसे तो पाकिस्तान का ईस्ट पाकिस्तान पर ध्यान कम था। इसलिए यह विवाद इतना बड़ा नहीं यह विवाद बड़ा तब बना जब बांग्लादेश अस्तित्व में आया। 1971 के बाद तिस्ता नदी के पानी के बंटवारे पर जमकर विवाद होना शुरू हो गया। बांग्लादेश की सरकार की तरफ से इसे लेकर बार-बार भारत पर एक दबाव बनता रहा। भारत बांग्लादेश के बीच ये नदी विवाद की सबसे बड़ी वजह माना जाता है जो 2011 में बस खत्म ही होने वाला था कि तब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी ने इस नदी के बंटवारे को मानने से ही इंकार कर दिया। जिसके बाद यह फिर लटक गया। फिर पिछले साल 2024 में शेख हसीना की मंजूरी के बाद यह फाइनल हो पाता उससे पहले ही उनकी सरकार गिर गई। अंतरिम सरकार आई यूनिस सरकार का काला खेल यहां फिर शुरू हो गया। यूनुस सरकार ने बिना देखे बिना समझे चीन की एंट्रीज प्रोजेक्ट में करा दी है।
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Gaza Peace Board पर Trump का बड़ा दांव, Morocco की ‘हां’ के बाद अब PM Modi के जवाब का इंतजार
by प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क on January 20, 2026 at 5:34 am
मोरक्को के विदेश मंत्रालय ने बताया कि किंग मोहम्मद VI ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के पीस बोर्ड में संस्थापक सदस्य के रूप में शामिल होने का निमंत्रण स्वीकार कर लिया है। मंत्रालय ने एमएपी समाचार एजेंसी द्वारा प्रकाशित एक बयान में कहा कि शांति को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की प्रतिबद्धता और दूरदृष्टि का स्वागत करते हुए, किंग मोहम्मद VI ने सहर्ष इस निमंत्रण को स्वीकार कर लिया है। मंत्रालय ने आगे कहा कि देश इस बोर्ड की स्थापना करने वाले चार्टर का अनुमोदन करेगा। इसमें कहा गया है कि अमेरिका के नेतृत्व वाली इस पहल का उद्देश्य “मध्य पूर्व में शांति प्रयासों में योगदान देना और दुनिया भर में संघर्षों को सुलझाने के लिए एक नया दृष्टिकोण अपनाना है।इसे भी पढ़ें: बिना मोदी गाजा पर नहीं होगा फैसला! ट्रंप ने किया इनवाइट, पीस बोर्ड में भारत का रोल क्या रहने वाला है?इस बोर्ड की मूल अवधारणा गाजा के पुनर्निर्माण की देखरेख करना था, लेकिन इसके चार्टर में इसकी भूमिका को केवल फिलिस्तीनी क्षेत्र तक सीमित नहीं किया गया है। एएफपी द्वारा देखे गए बोर्ड के चार्टर में कहा गया है कि सदस्य देशों (जिनका प्रतिनिधित्व बोर्ड में उनके राष्ट्राध्यक्ष या सरकार प्रमुख द्वारा किया जाएगा) को तीन साल या उससे अधिक समय के लिए शामिल होने की अनुमति दी जाएगी, बशर्ते वे पहले वर्ष के भीतर 1 अरब डॉलर से अधिक का भुगतान करें। इसे भी पढ़ें: Gaza पर Trump का बड़ा दांव, Putin को भेजा Board of Peace का न्योता, क्रेमलिन बोला- कर रहे समीक्षाव्हाइट हाउस ने कहा कि बोर्ड ऑफ पीस में कूटनीति, विकास, अवसंरचना और आर्थिक रणनीति में अनुभव रखने वाले” नेता शामिल हैं। व्हाइट हाउस ने तुर्किये, मिस्र, अर्जेंटीना, इंडोनेशिया, इटली, मोरक्को, ब्रिटेन, जर्मनी, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया समेत लगभग 60 देशों के राष्ट्राध्यक्षों को इस शांति निकाय में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा और ट्रंप के वरिष्ठ वार्ताकार जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ भी इस निकाय का हिस्सा हैं।
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Greenland Dispute | घर में आग लगने के डर से क्या घर जला दें? ग्रीनलैंड को लेकर भिड़े अमेरिका-फ्रांस! उड़ाया Donald Trump का मजाक
by प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क on January 20, 2026 at 4:55 am
अमेरिका और फ्रांस के बीच कूटनीतिक जंग अब खुले उपहास और आर्थिक धमकियों के स्तर पर पहुंच गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड को नियंत्रण में लेने की महत्वाकांक्षा पर फ्रांस ने तीखा तंज कसते हुए वाशिंगटन की दलीलों को हास्यास्पद करार दिया है।अमेरिका की दलील: “शांति के लिए कब्जा जरूरी”विवाद तब गहराया जब अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेन्ट ने ट्रंप के ग्रीनलैंड मोह का बचाव किया। उन्होंने तर्क दिया कि भविष्य में आर्कटिक क्षेत्र में रूस से खतरा पैदा हो सकता है। बेसेन्ट ने कहा, “यूरोपीय देश कमजोरी दिखाते हैं, जबकि अमेरिका ताकत। अगर भविष्य में रूस ग्रीनलैंड पर हमला करता है, तो हमें युद्ध में घसीटा जाएगा। इसलिए बेहतर है कि इसे अभी अमेरिका का हिस्सा बना लिया जाए ताकि संघर्ष की नौबत ही न आए।” इसे भी पढ़ें: Donald Trump को Norway का सीधा जवाब, ‘नोबेल बांटना सरकार का काम नहीं, स्वतंत्र समिति ही तय करेगी हकदार’ घर में आग लगने के डर से क्या घर जला दें?रविवार को एक इंटरव्यू में, बेसेंट ने ट्रंप के ग्रीनलैंड के मकसद का बचाव करते हुए कहा कि 79 साल के राष्ट्रपति आर्कटिक क्षेत्र में रूस से भविष्य के खतरों पर ध्यान दे रहे हैं। “आगे चलकर, आर्कटिक के लिए यह लड़ाई असली है… हम अपनी नाटो गारंटी बनाए रखेंगे। और अगर रूस या किसी दूसरे इलाके से ग्रीनलैंड पर हमला होता है, तो हम इसमें घसीटे जाएंगे।”उन्होंने आगे कहा, “तो अभी बेहतर है, ताकत के ज़रिए शांति, इसे यूनाइटेड स्टेट्स का हिस्सा बना लें, और कोई टकराव नहीं होगा क्योंकि यूनाइटेड स्टेट्स अभी दुनिया का सबसे ताकतवर देश है। हम दुनिया के सबसे मज़बूत देश हैं। यूरोपीय कमज़ोरी दिखाते हैं। अमेरिका ताकत दिखाता है।” इसे भी पढ़ें: कर्नाटक में मचा हड़कंप: पुलिस ऑफिस में ‘रंगीनमिजाजी’ का वीडियो वायरल, DGP लेवल के अधिकारी रामचंद्र राव सस्पेंडइस पर फ्रांस की तरफ से तुरंत जवाब आया, जिसने कई मज़ाकिया ट्वीट किए। “अगर कभी आग लगती है, तो फायरफाइटर दखल देंगे – तो अभी ही घर जला देना बेहतर है। अगर कभी शार्क हमला कर सकती है, तो दखल देना होगा – तो अभी ही लाइफगार्ड को खा लेना बेहतर है। अगर कभी कोई दुर्घटना होती है, तो नुकसान होगा – तो अभी ही कार को टक्कर मार देना बेहतर है,” फ्रेंच रिस्पॉन्स, जो फ्रेंच विदेश मंत्रालय का आधिकारिक रिस्पॉन्स अकाउंट है, ने माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म पर लिखा।इस बीच, फ्रांस के वित्त मंत्री रोलैंड लेस्क्योर ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि ग्रीनलैंड पर कंट्रोल करने की कोई भी कोशिश EU और वाशिंगटन के बीच व्यापार और आर्थिक संबंधों को खतरे में डाल देगी, फाइनेंशियल टाइम्स ने रिपोर्ट किया। “ग्रीनलैंड एक संप्रभु देश का संप्रभु हिस्सा है जो EU का हिस्सा है। इसके साथ छेड़छाड़ नहीं की जानी चाहिए,” उन्होंने कहा, और बताया कि ऐसा ही संदेश उनके अमेरिकी समकक्ष बेसेंट को भी दिया गया था।हालांकि, लेस्क्योर ने इस बात पर ज़ोर दिया कि दोनों पक्षों के बीच चल रहे तनाव के बावजूद, यूरोप को अपनी साझा प्राथमिकताओं पर अमेरिका के साथ मिलकर काम करने की ज़रूरत है, जैसे कि दुर्लभ पृथ्वी खनिजों के लिए चीन पर निर्भरता कम करने के लिए G7 में फ्रांस के नेतृत्व वाली पहल।27 देशों वाले EU के अमेरिका के साथ अब तक के सबसे बड़े द्विपक्षीय व्यापार संबंध हैं, जिसमें वाशिंगटन इस ब्लॉक का सबसे बड़ा निर्यात बाज़ार है। ग्रीनलैंड को लेकर तनाव के बीच, ट्रंप ने हाल ही में 1 फरवरी, 2026 से डेनमार्क और फ्रांस सहित कई यूरोपीय देशों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की है। 79 वर्षीय ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी कि अगर ग्रीनलैंड पर किसी समझौते पर सहमति नहीं बनी, तो 1 जून से टैरिफ बढ़कर 25 प्रतिशत हो जाएगा। उन्होंने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि अमेरिका सदियों से यूरोपीय देशों को “सब्सिडी” दे रहा है, और अब डेनमार्क को वापस देने का समय आ गया है, क्योंकि “दुनिया की शांति दांव पर है”।फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए ट्वीट किया कि “कोई धमकी या दबाव” EU को “न तो यूक्रेन में, न ग्रीनलैंड में, और न ही दुनिया में कहीं और” प्रभावित करेगा। आठ यूरोपीय देशों के एक संयुक्त बयान में आगे कहा गया कि वे “डेनमार्क साम्राज्य और ग्रीनलैंड के लोगों के साथ पूरी एकजुटता से खड़े हैं”।इसके अलावा, टैरिफ के बाद EU अपने सबसे शक्तिशाली व्यापार जवाबी कार्रवाई उपकरण – तथाकथित ‘ट्रेड बज़ूका’ – के इस्तेमाल पर विचार कर रहा है। इसकी घोषणा मैक्रों ने आपातकालीन बातचीत के बाद की। ‘ट्रेड बज़ूका’ एंटी-कोर्सियन इंस्ट्रूमेंट (ACI) को संदर्भित करता है, जो एक ऐसा तंत्र है जिसका उद्देश्य गैर-ब्लॉक देशों के आर्थिक दबाव के खिलाफ अपने हितों की रक्षा करने के लिए EU की क्षमता को बढ़ाना है। आर्थिक युद्ध की आहट: ‘ट्रेड बजूका’ बनाम ‘टैरिफ’ग्रीनलैंड को लेकर छिड़ी इस जंग ने अब व्यापारिक रिश्तों में कड़वाहट घोल दी है:ट्रंप की धमकी: ट्रंप ने डेनमार्क और फ्रांस समेत कई यूरोपीय देशों पर 10% टैरिफ लगाने की घोषणा की है, जो 1 फरवरी 2026 से लागू होगा। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि ग्रीनलैंड पर समझौता नहीं हुआ, तो 1 जून से इसे बढ़ाकर 25% कर दिया जाएगा।फ्रांस की चेतावनी: फ्रांस के वित्त मंत्री रोलैंड लेस्क्योर ने साफ कहा है कि ग्रीनलैंड एक संप्रभु देश (डेनमार्क) का हिस्सा है और इसके साथ छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी।यूरोपीय संघ का ‘बजूका’: इमैनुएल मैक्रों ने आपातकालीन वार्ता के बाद ‘एंटी-कोअर्सन इंस्ट्रूमेंट’ (ACI) यानी ‘ट्रेड बजूका’ चलाने के संकेत दिए हैं। यह एक ऐसा हथियार है जिससे यूरोपीय संघ आर्थिक दबाव बनाने वाले देशों (जैसे अमेरिका) के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करता है।
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Over 1 lakh items forgotten in Dubai taxis: You won’t believe what people left behind; tips to get it back
by TOI World Desk on January 20, 2026 at 7:24 am
Dubai’s taxis saw a record 104,162 items lost in 2025, including over AED 2 million in cash, 35,000 electronics and 3,000 official documents. The RTA’s efficient, multilingual system, utilising call centers, virtual agents and a smart app, ensures swift recovery, often within two hours, fostering trust in the city’s mobility network.
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‘No going back’: Trump posts image showing Canada, Greenland as US territory; what he told Nato chief
by TOI World Desk on January 20, 2026 at 7:19 am
US President Donald Trump is set to push for acquiring Greenland at the Davos Economic Forum, citing Denmark’s inability to protect the territory. He shared an image depicting Greenland as US territory and stated its acquisition is imperative for national and world security. Trump also mentioned a call with NATO Secretary General Mark Rutte regarding the Danish island.
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Love Is Blind, Habibi to Dubai Bling: Netflix drops boldest Arabic originals for 2026 and fans can’t keep calm
by TOI World Desk on January 20, 2026 at 6:20 am
Netflix is set to launch a diverse Arabic entertainment lineup in 2026. Fan favourites like ‘Love Is Blind, Habibi’ and ‘Dubai Bling’ return. New films and series including ‘From the Ashes: The Pit’, ‘Chasing Shadows’ and ‘Obsess’ will also be available. This slate highlights Netflix’s commitment to regional storytelling and Arab talent on a global scale.
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“Completely unfounded”: UAE Ministry of Defence denies Yemen Riyan Airport weapons allegations
by TOI World Desk on January 20, 2026 at 5:50 am
The UAE Ministry of Defence has firmly rejected allegations of weapons, explosives, and secret prisons at Riyan Airport in Mukalla, Yemen. The Ministry confirmed that all Emirati forces and equipment withdrew from Yemen on 2 January 2026. Officials called the claims unfounded and politically motivated, emphasizing that the facilities in question are standard military structures with no hidden purpose.
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Abu Dhabi crowned World’s Safest City for 10th straight year: How the UAE capital does it
by TOI World Desk on January 20, 2026 at 5:12 am
Abu Dhabi has once again been crowned the world’s safest city for the tenth year running, according to the latest Numbeo Global Safety Index. This remarkable achievement highlights the UAE capital’s consistent dedication to public safety through advanced technology, proactive policing and strong community engagement, ensuring residents and visitors feel secure at all hours.

